घोटाला नहीं, सत्ता की साजिश थी न्यायालय की टिप्पणी ने खोली सच्चाई : डॉ सुमित पुन्याल 

धर्मपुर एक्सप्रेस । हमीरपुर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा क्रांति के निर्माता मनीष सिसोदिया को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने सरकारी स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाया। मोहल्ला क्लीनिक से स्वास्थ्य सेवाएँ आम लोगों तक पहुँचाईं,सस्ती बिजली, मुफ्त पानी जैसी जनकल्याणकारी नीतियाँ लागू कीं,पारदर्शी और जवाबदेह शासन का मॉडल दिया

यह वही नीतियाँ हैं जिन्होंने आम आदमी की राजनीति को जमीन से जोड़ा। आम आदमी पार्टी की नीतियाँ: शिक्षा सुधार, स्वास्थ्य सुविधा, भ्रष्टाचार मुक्त शासन, जनता केंद्रित विकास देश में एक नया राजनीतिक मॉडल बना रही थीं।

यही मॉडल उन ताकतों को असहज कर रहा था जो सत्ता को सेवा नहीं, नियंत्रण का माध्यम मानती हैं।भारतीय जनता पार्टी पर यह गंभीर प्रश्न खड़ा होता है कि पहले आरोप गढ़े गए फिर जांच एजेंसियों का सहारा लिया गया, मीडिया ट्रायल चलाया गयाऔर अंततः जनहित की राजनीति को बदनाम करने का प्रयास हुआ।

क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई थी?

या सत्ता हथियाने की एक सुनियोजित रणनीति?

संस्थाओं का दुरुपयोग — लोकतंत्र के लिए खतरा

यह पूरा प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि कैसे बिना प्रमाण के आरोपों को प्रचारित किया गया। स्वायत्त संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग हुआ, जनहित के नेताओं को अपराधी की तरह पेश किया गया।

लेकिन न्यायपालिका ने स्पष्ट कर दिया। राजनीतिक आरोप, कानूनी सत्य नहीं होते।आरोप लगाना आसान है,छवि खराब करना आसान है। लेकिन सत्य को दोषी साबित करना आसान नहीं। यह लड़ाई केवल एक पार्टी की नहीं थी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई है।

यह लड़ाई थी जनसेवा बनाम सत्ता की राजनीति।आज यह साबित हो चुका है कि घोटाला नहीं था -घोटाले का नैरेटिव था। भ्रष्टाचार नहीं था —सत्ता की बेचैनी थी। सत्य दबाया गया —लेकिन पराजित नहीं हुआ।

 

Dharampur Express
Author: Dharampur Express

Himachal Pradesh