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स्मार्ट मीटर के विरोध में उपभोक्ता कल्याण मंच ने की पत्रकार वार्ता

धर्मपुर एक्सप्रेस। हमीरपुर 

स्मार्ट मीटर की पूरी लागत उपभोक्ताओं से टैरिफ के माध्यम से वसूली जाएगी, इसलिए उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा कानूनी अधिकार है कि आखिर इन मीटरों की आवश्यकता क्या है, इन्हें किस तकनीकी आधार पर लगाया जा रहा है और स्वीकृत लागत से कहीं अधिक राशि पर ठेका क्यों दिया गया। यदि तकनीकी दृष्टि से मौजूदा डिजिटल मीटर पर्याप्त हैं, तो उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालकर स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव क्यों बनाया जा रहा है?

 

इन्हीं गंभीर प्रश्नों को लेकर आज उपभोक्ता कल्याण मंच द्वारा होटल हमीर में स्मार्ट मीटर योजना के संबंध में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में मंच के मुख्य संरक्षक पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी  जे.एम. पठानिया, संयोजक कुलदीप सिंह खरवाड़ा, सह-संयोजक एडवोकेट  सुरेश राठौर, महासचिव  जे.के. धीमान तथा विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के जिला महासचिव  विजय शर्मा उपस्थित रहे।

 

मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि केन्द्र सरकार की आरडीएसएस योजना के अंतर्गत बिजली कानून, 2003 की भावना एवं उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी करते हुए स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह योजना न तो उपभोक्ताओं के हित में है और न ही हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के दीर्घकालिक हित में, बल्कि इसका प्रमुख लाभ निजी कॉरपोरेट कंपनियों को मिलने की आशंका है।

 

उन्होंने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने से इंकार करता है तो उसे नोटिस जारी करना तथा बिजली काटने की चेतावनी देना अनुचित है। मंच का कहना है कि बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के अनुसार उपभोक्ताओं के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा उन्हें उनकी सहमति एवं कानूनी स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए।

 

मंच ने सवाल उठाया कि विद्युत बोर्ड के अधिकारी यह स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे हैं कि लगभग 9–10 हजार रुपये कीमत वाले प्रत्येक स्मार्ट मीटर की लागत अंततः नौ वर्षों तक टैरिफ के माध्यम से उपभोक्ताओं से ही वसूली जाएगी। यदि भविष्य में मीटर जल जाता है, खराब हो जाता है अथवा किसी कारण से बदलना पड़ता है, तो उसकी वित्तीय जिम्मेदारी किसकी होगी, इस संबंध में भी कोई स्पष्ट नीति सार्वजनिक नहीं की गई है।

 

प्रतिनिधियों ने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व ही पूरे प्रदेश में सैकड़ों करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) मीटर पूरी तरह कार्यशील हैं। ऐसे में तकनीकी रूप से सक्षम इन मीटरों को हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाने की आवश्यकता क्या है? यदि वर्तमान मीटर पर्याप्त हैं, तो उन्हें कबाड़ बनाकर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का औचित्य क्या है?

 

मंच ने यह भी प्रश्न उठाया कि जब स्मार्ट मीटरिंग परियोजना लगभग 1800 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत पर थी, तो लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत पर ठेका क्यों दिया गया। इस अतिरिक्त व्यय का भार अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा, इसलिए इसकी पारदर्शी जांच आवश्यक है।

 

मंच ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी विद्युत बोर्ड के हितों की रक्षा करने के बजाय निजी कंपनियों के हितों को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर दबाव डालकर उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं तथा नए कनेक्शनों में सर्विस लाइन का कार्य बोर्ड कर्मचारियों से करवाया जा रहा है, जबकि अंतिम कनेक्शन निजी कंपनी के कर्मचारी कर रहे हैं। मंच का कहना है कि यदि टेंडर की शर्तों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है तो इसकी भी जांच होनी चाहिए।

 

उपभोक्ता कल्याण मंच ने कहा कि स्मार्ट मीटर के कथित लाभों का प्रचार तो किया जा रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं को यह नहीं बताया जा रहा कि प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक, 2025 लागू होने की स्थिति में निजी कंपनियों को बिना नया वितरण ढांचा बनाए वर्तमान सरकारी नेटवर्क का उपयोग करते हुए लाभकारी उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने का अवसर मिल सकता है। ऐसी स्थिति में स्मार्ट मीटरिंग का उपयोग निजी कंपनियों के लिए डेटा आधारित बिलिंग एवं प्रबंधन प्रणाली के रूप में किया जा सकता है, जबकि संपूर्ण वितरण नेटवर्क के रखरखाव और विस्तार की जिम्मेदारी सरकारी विद्युत बोर्ड पर ही बनी रहेगी।

 

मंच ने आशंका व्यक्त की कि यदि लाभकारी औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ता निजी कंपनियों के पास चले जाते हैं, तो विद्युत बोर्ड की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था कमजोर होगी तथा अंततः घरेलू एवं अन्य उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

 

अंत में उपभोक्ता कल्याण मंच ने प्रदेश सरकार से स्मार्ट मीटरिंग योजना पर तत्काल पुनर्विचार करने, सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने तथा उपभोक्ताओं को भय और दबाव के माध्यम से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। मंच ने चेतावनी दी कि यदि उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो प्रदेश भर के बिजली उपभोक्ताओं के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

 

Dharampur Express
Author: Dharampur Express

Himachal Pradesh