धर्मपुर एक्सप्रेस। शिमला
प्रदेश के हाल ही में प्रस्तुत बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री शाश्वत कपूर ने कहा कि यह बजट प्रदेश के युवाओं के साथ एक बड़ा अन्याय है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में योजनाओं की लंबी सूची तो पेश की है, लेकिन जब बात रोजगार की आती है, तो यह बजट पूरी तरह खोखला नजर आता है।
शाश्वत कपूर ने कहा कि सरकार के युवाओं से किए गए वादों के अनुसार इस बजट में युवा चौथे साल में 4 लाख नौकरियों की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन सरकार द्वारा उन्हें सिर्फ 500 कैंपस इंटरव्यू, 1000 युवाओं को विदेश भेजने और 500 ई-टैक्सी जैसी सीमित घोषणाएँ ही दी गई हैं। यह प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के साथ मजाक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार मान चुकी है कि वह प्रदेश में रोजगार देने में असफल हो चुकी है, इसलिए युवाओं को बाहर भेजने की बात कर रही है?
उन्होंने कहा की आज जहाँ हिमाचल प्रदेश पूरे देश में शत प्रतिशत साक्षरता दर के साथ अग्रणी राज्य है वहीं दुर्भाग्यवश वह पूरे देश का सबसे बेरोजगार प्रदेश भी है। उन्होंने कहा कि आज हिमाचल का पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी के कारण मजबूरी में प्रदेश से बाहर पलायन कर रहा है, जो कि सरकार की नीतिगत विफलता को दर्शाता है।
शाश्वत कपूर ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने की बजाय उन्हें स्वरोजगार के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। उन्होंने कहा कि हर युवा उद्यमी नहीं बन सकता और सरकार का कर्तव्य है कि वह बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित कर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराए।
उन्होंने यह भी कहा कि बजट में न तो IT सेक्टर के विकास का कोई स्पष्ट रोडमैप है और न ही बड़े निवेश को आकर्षित करने की ठोस रणनीति दिखाई देती है। ऐसे में प्रदेश के युवाओं के लिए भविष्य की कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आती।
शाश्वत कपूर ने कहा कि हिमाचल का युवा अब जाग चुका है और केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं होगा। प्रदेश के युवाओं को स्थायी रोजगार, सम्मानजनक आय और अपने ही राज्य में बेहतर अवसर चाहिए, और सरकार को इसके लिए जवाबदेह होना पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश के गद्दी समुदाय, जो सदियों से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहकर पशुपालन और ऊन उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न हैं, एक बार फिर प्रदेश सरकार के बजट में स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
जहां एक ओर सरकार द्वारा दालों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रदान किया गया है, वहीं दूसरी ओर गद्दी समुदाय की आजीविका का मुख्य आधार ऊन आज मात्र 25-30 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर बिक रही है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि इस महत्वपूर्ण उत्पाद के लिए अब तक किसी प्रकार का MSP निर्धारित नहीं किया गया है।
गद्दी समुदाय के लोग हिमाचल के सबसे दुर्गम और जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में रहकर अपनी आजीविका चलाते हैं। कठोर मौसम, सीमित संसाधनों और जीवन के निरंतर खतरों के बावजूद वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर में अपना अमूल्य योगदान देते हैं।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर कब तक प्रदेश सरकार इस मेहनतकश और समर्पित समुदाय को इसी प्रकार नजरअंदाज करती रहेगी? क्या गद्दी समुदाय की समस्याएं और उनकी आजीविका सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं?
शाश्वत कपूर ने सरकार से मांग की कि गद्दी समुदाय की ऊन पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तुरंत लागू किया जाए, ताकि उन्हें उनके परिश्रम का उचित मूल्य मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान हो।
Author: Dharampur Express
Himachal Pradesh






