बंदरों का आतंक राष्ट्रीय समस्या, निपटने के लिए बने व्यापक कार्ययोजना: अनुराग सिंह ठाकुर

धर्मपुर एक्सप्रेस। हमीरपुर 

पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत बंदर आतंक की गंभीर और लंबे समय से उपेक्षित समस्या को राष्ट्रीय संकट करार देते हुए तत्काल और समन्वित केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की।

 

अनुराग सिंह ठाकुर ने सदन का ध्यान देशभर, विशेष रूप से कृषि प्रधान राज्यों में अनियंत्रित बंदर आबादी से हो रही भारी तबाही की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 70,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि पर खेती छोड़नी पड़ी है। राज्य में वार्षिक फसल नुकसान 500 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि 2017 से 2024 के बीच कुल नुकसान लगभग 2,200 करोड़ रुपये आंका गया है।

 

आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उन्होंने मानव जीवन और सुरक्षा पर बढ़ते खतरे को भी रेखांकित किया। जिला स्तर के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले एक वर्ष में एक जिले में प्रतिदिन लगभग दस लोग बंदरों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

 

समस्या के कारणों पर बोलते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने 1978 के बंदर निर्यात प्रतिबंध को प्रमुख कारण बताया, जिसके चलते आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ी। इसके अलावा वनों की कटाई, प्राकृतिक आवासों का क्षरण, शिकारी प्रजातियों की कमी और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नीति के अभाव को भी जिम्मेदार ठहराया।

 

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि बंदरों का आतंक अब राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। किसानों को खेती छोड़नी पड़ रही है और आम नागरिक लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं। राज्यों के लिए अकेले इस समस्या से निपटना संभव नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार को मानवीय और वैज्ञानिक आधार पर राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करनी चाहिए।

 

उन्होंने केंद्र सरकार से बंदर-मानव संघर्ष पर व्यापक राष्ट्रीय कार्य योजना बनाने का आग्रह किया, जिसमें प्रभावित राज्यों से परामर्श किया जाए। साथ ही बड़े पैमाने पर नसबंदी कार्यक्रम, इम्यूनोकॉन्ट्रासेप्शन तकनीकों का उपयोग और प्राकृतिक आवासों की बहाली जैसे उपायों को अपनाने की मांग की।

 

अनुराग सिंह ठाकुर ने किसानों के लिए समयबद्ध और मानकीकृत मुआवजा व्यवस्था लागू करने तथा जमीनी स्तर पर सामुदायिक फसल सुरक्षा प्रणालियां स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने इस उद्देश्य के लिए समर्पित बजटीय प्रावधान और राज्य सरकारों को वैज्ञानिक व मानवीय उपायों के क्रियान्वयन हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने इसे केवल राज्य नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का विषय बताते हुए व्यापक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।

Dharampur Express
Author: Dharampur Express

Himachal Pradesh