प्रकृति की मार और नीतिगत उपेक्षा के बीच जूझता हिमाचल प्रदेश : विशाल 

धर्मपुर एक्सप्रेस। नादौन 

भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-2027 को राष्ट्रीय विकास और आर्थिक स्थिरता का दस्तावेज़ बताया जा रहा है, किंतु जब इसे हिमाचल प्रदेश की जमीनी परिस्थितियों के संदर्भ में परखा जाता है, तो यह दावा खोखला प्रतीत होता है। हिमाचल प्रदेश, जो बीते कुछ वर्षों से लगातार प्राकृतिक आपदाओं, आर्थिक दबावों और सीमित संसाधनों से जूझ रहा है, इस बजट से संवेदनशीलता, विशेष सहयोग और ठोस राहत की अपेक्षा कर रहा था। परंतु बजट की प्राथमिकताएँ यह संकेत देती हैं कि देवभूमि हिमाचल की वास्तविक चुनौतियों को एक बार फिर अनदेखा किया गया है।

सबसे गंभीर प्रश्न प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ा है। हिमाचल प्रदेश ने हाल के वर्षों में अभूतपूर्व तबाही झेली है। भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़, सड़कों और पुलों का ध्वस्त होना तथा हजारों परिवारों का विस्थापन अब राज्य की स्थायी पीड़ा बन चुका है। इन आपदाओं ने केवल घर ही नहीं उजाड़े, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भी गहरी चोट पहुँचाई है। ऐसे समय में यह अपेक्षित था कि केंद्रीय बजट 2026-2027 में हिमालयी और आपदाग्रस्त राज्यों के लिए विशेष पुनर्वास और पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा होती। किंतु इस दिशा में किसी ठोस, राज्य-विशेष प्रावधान का अभाव केंद्र सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करता है।

हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियाँ उसे अन्य राज्यों से अलग बनाती हैं। यहाँ विकास की लागत अधिक है और संसाधनों की उपलब्धता सीमित। पहाड़ी इलाकों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण मैदानी राज्यों की तुलना में कई गुना महँगा पड़ता है। इसके बावजूद बजट 2026-2027 में हिमाचल को सामान्य राज्यों की तरह ही देखा गया। यह नीति समानता के नाम पर असमानता को बढ़ावा देती है और पहाड़ी राज्यों की विशेष आवश्यकताओं की अनदेखी करती है।

कृषि और बागवानी हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सेब, फल और सब्ज़ी उत्पादन पर राज्य की बड़ी आबादी निर्भर है। परंतु यह क्षेत्र पहले से ही मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और बाजार की अस्थिरता से जूझ रहा है। केंद्रीय बजट 2026-2027 में पहाड़ी किसानों के लिए न तो कोई विशेष समर्थन मूल्य व्यवस्था दिखाई देती है और न ही परिवहन, भंडारण या विपणन में राहत के प्रभावी उपाय। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि विषम परिस्थितियों में उत्पादन करने वाले किसानों की मेहनत और संघर्ष को नीति निर्माण में उचित स्थान नहीं दिया गया।

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को लेकर बजट में बड़े दावे किए गए हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश की वास्तविक ज़रूरतें फिर पीछे छूट गई हैं। राज्य की अनेक सड़कें, संपर्क मार्ग और पुल आज भी आपदाओं के बाद अधूरे या क्षतिग्रस्त पड़े हैं। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बहाल करना यहाँ के लोगों की प्राथमिक आवश्यकता है। पर्यटन को बढ़ावा देने की घोषणाएँ ज़रूर की गई हैं, परंतु जब बुनियादी ढांचा ही कमजोर होगा, तो पर्यटन विकास के ये दावे ज़मीनी स्तर पर खोखले ही साबित होंगे।

पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के मोर्चे पर भी हिमाचल प्रदेश के साथ न्याय नहीं हुआ। हिमाचल प्रदेश देश के पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके जंगल, नदियाँ और पर्वतीय पारिस्थितिकी पूरे उत्तर भारत के लिए जीवनरेखा हैं। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन, आपदा-निवारण और पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य-विशेष वित्तीय सहायता या हरित निधि का कोई स्पष्ट प्रावधान बजट 2026-2027 में नहीं किया गया। यह विडंबना ही है कि जो राज्य देश को पर्यावरणीय सुरक्षा प्रदान करता है, वही राज्य स्वयं उपेक्षा का शिकार है।

राजकोषीय अनुशासन के नाम पर हिमाचल प्रदेश पर अतिरिक्त बोझ डालना भी इस बजट की एक बड़ी कमजोरी है। बढ़ते कर्ज़, सीमित राजस्व और आपदा-जनित खर्चों के बावजूद राज्य को न तो उधार सीमा में राहत दी गई और न ही विशेष राजस्व सहायता का प्रावधान किया गया। यह दृष्टिकोण अनुशासन से अधिक कठोरता और असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

समग्र रूप से देखा जाए तो केंद्रीय बजट 2026-2027 हिमाचल प्रदेश की जनता की वास्तविक समस्याओं और अपेक्षाओं को संबोधित करने में असफल रहा है। यह बजट न तो आपदा से जूझते राज्य को आवश्यक राहत देता है और न ही उसके दीर्घकालिक, संतुलित और टिकाऊ विकास के लिए कोई भरोसेमंद मार्ग प्रस्तुत करता है। प्रकृति की मार और नीतिगत उपेक्षा के बीच खड़ा हिमाचल प्रदेश आज यह महसूस कर रहा है कि राष्ट्रीय विकास की योजनाओं में उसकी पीड़ा, संघर्ष और योगदान को वह महत्व नहीं मिला, जिसका वह वास्तविक रूप से हकदार है। यही कारण है कि यह बजट देवभूमि हिमाचल की जनता के साथ किए गए अन्याय और उपेक्षा का प्रतीक बनकर सामने आता है।

Dharampur Express
Author: Dharampur Express

Himachal Pradesh