धर्मपुर एक्सप्रेस। हमीरपुर
विश्व हीमोफीलिया दिवस पर बसंत रिजॉर्ट हमीरपुर में जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में हीमोफीलिया से ग्रस्त लोग पहुंचे जिनमें अधिकांश बच्चे शामिल थे। इस दौरान चिकित्सकों ने हीमोफीलिया के संदर्भ में जानकारी उपलब्ध करवाई तथा इसके उपचार से संबंधित जानकारी भी साझा की। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आरके अग्निहोत्री सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आरके अग्निहोत्री ने कहा कि हीमोफीलिया आमतौर पर एक वंशानुगत रक्तस्राव विकार है जिसमें रक्त ठीक से नहीं जमता है। इससे सहज रक्तस्राव के साथ-साथ चोट या सर्जरी के बाद रक्त स्राव भी हो सकता है। रक्त में कई प्रोटीन होते हैं जिन्हें क्लॉटिंग कारक कहा जाता है जो रक्तस्राव को रोकने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक वंशानुगत बीमारी है और परिजनों से उनके बच्चों को हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी अधिकांश पुरुष बच्चों में पाई जाती है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी में ब्लीडिंग स्टेज के मुताबिक होती है। उन्होंने कहा कि यदि यह टाइप एक का है तो इसमें ब्लीडिंग ज्यादा होती है। उन्होंने कहा कि यदि लक्षण काम है तो बीमारी 8 से 12 हफ्तों में आ सकती है। उन्होंने कहा कि इसका लक्षण सिर्फ ब्लीडिंग होती है जो की आंख नाक या अन्य हिस्से से हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसका बचपन में ही पता लग जाता है। उन्होंने कहा कि इसका अभी तक कोई स्थाई उपचार नहीं है लेकिन इस पर शोध कार्य चल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बच्चों का उपचार करने के लिए इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि यह इंजेक्शन काफी कीमती है तथा यह नियमित तौर पर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की वजह से परिजन भी परेशान हैं क्योंकि ब्लीडिंग अधिक होने से दिक्कत बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी में जॉइंट पेन और जॉइंट स्वेलिंग हो जाती है। इस वजह से बच्चों को अधिक परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिला में इस तरह के बच्चों को आईडेंटिफाई करने के लिए योजना बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जो हमारे डॉक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केदो में तैनात हैं उनसे भी इस बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की बीमारी से ग्रसित बच्चों को उपचार के लिए कहीं दूर दराज ना जाना पड़े इसके लिए मेडिकल ऑफिसर के साथ अटैच किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर ने कहा कि हमीरपुर में भी इस बीमारी से ग्रसित 10 बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि घर के नजदीक ही मरीजों को उपचार मिल जाए। इसके लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
Author: Dharampur Express
Himachal Pradesh